आहिस्ता चल ज़िन्दगी by shivam maurya

  आहिस्ता चल ज़िन्दगी,

अभी कई कर्ज़ चुकाना बाकी है.
कुछ दर्द मिटाना बाकी है,
कुछ फर्ज़ निभाना बाकी है.
रफ़्तार में तेरी चलने से
कुछ रूठ गए, कुछ छूट गए,
रूठों को मनाना बाकी है,
रोतों को हँसाना बाकी है.
कुछ रिश्ते बनकर टूट गए,
कुछ जुड़ते-जुड़ते छूट गए.
उन टूटे-छूटे रिश्तों के
जख्मों को मिटाना बाकी है.
कुछ हसरतें अभी अधूरी हैं,
कुछ काम भी और जरूरी हैं.
जीवन की उलझ पहेली को
पूरा सुलझाना बाकी है.
जब साँसों को थम जाना है,
फिर क्या खोना, क्या पाना है.
पर मन के जिद्दी बच्चे को
यह बात बताना बाकी है.
तू आगे चल मैं आता हूँ,
क्या छोड़ तुझे जी पाऊँगा ?
ख्वाहिशें जो घुट गई इस दिल में,
उनको दफ़नाना बाकी है.
इन साँसों पर हक है जिनका,
उनको समझाना बाकी है.
कुछ दर्द मिटाना बाकी है,
कुछ फर्ज़ निभाना बाकी है.
आहिस्ता चल ज़िन्दगी,
अभी कई कर्ज़ चुकाना बाकी है.
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न *राज़* है ... ज़िन्दगी
ना *राज़* है ... ज़िन्दगी
ना*राज* है..... जिंदगी
बस जो है, वो *आज* है ... ज़िन्दगी.
🙏🙏🙏🙏🙏🙏❤️
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